Raja Lal Bagh: "लाल बाग के राजा की खास बातें "

1900 के दशक में लालबाग में 100 मिलों का काफी प्रभुत्व रहा। यहां पर इस क्षेत्र में आगे चलकर 1930 की दशक में औद्योगीकरण के दौरान वहां के टेक्सटाइल वकर्स को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा, जिसके बाद वह गणपति के शरण में गए

महाराष्ट्र के गणपति मंदिर में 9 दिनों का भव्य आयोजन चलता है। हर साल की तरह इस बार भी गणेश चतुर्थी का महापर्व 7 सितम्बर, शनिवार से शुरू होकर 17 सितम्बर अनंत चतुर्दशी तक चलेगा।

9 दिनों तक चलता है लाल बाग के राजा का भव्य आयोजन

लाल बाग के राजा के मंदिर की स्थापना 1934 में की गई थी। गणेश जी का यह भव्य मंदिर महाराष्ट्र के मुंबई के परेल इलाके में स्थित है। लाल बाग के राजा को इच्छाओं की पूर्ति करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है।

लाल बाग के राजा के मंदिर का इतिहास

लालबागचा राजा को कई नामों से पुकारते हैं, जिसमें नवसाचा गणपति और इच्छा पूर्ति गणेश के रूप शामिल है। यहां पर दर्शन के लिए हर साल पहले से ही बुकिंग हो जाती हैं।

कई नामों से जाने जाते हैं इस पंडाल के गणराजा

मैरून रंग की पोशाक और सोने के आभूषणों से सजे बप्पा की 12 फुट की मूर्ति सभी का मन मोह रही थी। इस बार लालबागचा राजा की थीम अयोध्या के राम मंदिर से प्रेरित है, जिसे कला निर्देशक नितिन चंद्रकांत देसाई ने डिजाइन किया है। इसे देखते ही लोगों को सुखद अनुभव होता है।

राम मंदिर से प्रेरित हैं इस बार की थीम

बप्पा की स्थापना का निश्चय होने के बाद प्रतिमा बनाने की जिम्मेदारी कंबली परिवार ने उठाई, जो आज तक जारी है। इस परिवार के लोग ही लालबाग के गणपति की मूर्ति बनाते हैं और उसका रख-रखाव भी करते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने इस मूर्ति का डिजाइन भी पेटेंट कराया हुआ है।

इस जगह को लालबाग मार्केट क्यों नाम से जाना जाता है