Exclusive: 'तुर्की में हथियारों की ट्रेनिंग, 20 लाख रुपये के विस्फोटक खरीदे...', दिल्ली ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार शाहीन ने किए सनसनीखेज खुलासे
दिल्ली बम धमाका मामले में गिरफ्तार अल-फलाह मेडिकल कॉलेज, फरीदाबाद से जुड़ी डॉक्टर शाहीन सईद ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किये हैं. एजेंसी सूत्रों के अनुसार, शाहीन के बयान ने आतंकी साजिश, हथियार ट्रेनिंग, फॉरेन ट्रिप और विस्फोटक सामग्री जुटाने से जुड़े कई दावे किए है. अब इन सभी दावों की गहन जांच की जा रही है. शाहीन सईद ने बताया कि साल 2006 में उसने कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर के रूप में जॉइन किया, जहां वह 2013 तक कार्यरत रही. इसी दौरान उसकी पहली शादी डॉ. जाफर से हुई. साल 2013 में उसने गाजियाबाद के शारिक खान से दूसरी शादी की और 2014–2018 के बीच पति के साथ सऊदी अरब की मजमाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत रही. इस दौरान उसने 2015 में दुबई और 2018 में थाईलैंड की यात्रा भी की. वैवाहिक विवादों के चलते उसने 2017 में तलाक के लिए आवेदन दिया और साल 2023 में उसको कानूनी तौर पर तलाक मिल गया. बच्चों की कस्टडी उसके पति को मिली. साल 2021 में शाहीन सईद ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में जॉइन किया, जहां उसकी शुरुआती तनख्वाह लगभग 1 लाख रुपये महीना थी. कॉलेज में जॉइनिंग के एक महीने बाद तीन डॉक्टर, डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर और डॉ. मुजफ्फर कॉलेज में आए. समय के साथ शाहीन और डॉ. मुजम्मिल के बीच नजदीकियां बढ़ीं और सितंबर 2023 में उसने एक मौलवी की मौजूदगी में मदरसे में निकाह कर लिया. शाहीन का दावा है कि डॉ. मुजफ्फर और कभी-कभी डॉ. मुज़म्मिल भी अफगानिस्तान में बसने की बातें करता था क्योंकि वहां शरीयत कानून लागू है. शाहीन सईद ने आगे बताया कि साल 2022 में तीनों डॉक्टर कुछ दिनों के लिए कॉलेज से गायब हो गए. बाद में पता चला कि वे तुर्की गए थे, जहां उन्होंने हथियारों की ट्रेनिंग ली और फिर अफगानिस्तान जाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे. शाहीन के बयान के अनुसार, कश्मीर का रहने वाला एक युवक दानीश, जिसका कोडनेम छोटू था, अक्सर अल-फलाह कॉलेज आता था और डॉक्टर उमर के कमरे में रुकता था. वहीं, मोहसिन नामक कश्मीरी युवक अपनी i20 कार उमर को देता था इसी कार का इस्तेमाल ब्लास्ट में हुआ. अक्टूबर 2025 में एक सिग्नल ऐप ग्रुप बनाया गया, जिसमें मुजम्मिल, उमर, आदिल, मुफ्ती और मुजफ्फर सदस्य थे. बातचीत के दौरान वे लोग AK-47 को Alikak कहते थे. 2023 और 2024 में शाहीन दो बार कश्मीर गई और दोनों बार वो डॉ. मुजफ्फर के घर ही रुकी. उसने बताया कि उसने वेरिनाग और पहलगाम विजिट किया और डॉ. मुजम्मिल के माध्यम से मुफ्ती इरफान से भी मुलाकात की. एक रात उसने 20–25 साल के तीन लंबी दाढ़ी वाले युवकों को मुफ्ती के घर बैठक करते देखा. उसी रात मुजम्मिल और मुफ्ती देर रात तक बाहर रहे. पूछताछ में शाहीन सईद ने कबूला कि उसने मुजम्मिल को लगभग 20 लाख रुपये नकद पांच किश्तों में दिए. शाहीन के अनुसार, इन पैसों का इस्तेमाल फर्टिलाइजर खरीदने और विस्फोटक सामग्री तैयार करने में हुआ. हालांकि मुजम्मिल ने उन्हें बताया था कि वह यह पैसा कैदियों की मदद, कश्मीरियों के बेटरमेंट और मदरसा निर्माण में खर्च करेगा. बाद में उसने सिरोही में ग्राम प्रधान जुम्मा खान के माध्यम से एक कमरा 10,000 रुपये महीने पर किराए पर लिया, जहां उन्होंने फर्टिलाइजर स्टोर किया. उमर और मुजम्मिल के साथ मिलकर उन्होंने कैन बैग, ड्रम खरीदे और सामग्री तीन अलग-अलग स्थानों पर डंप की. शाहीन ने बताया कि मार्च 2025 में उसने उमर की कार में कई फर्टिलाइजर बैग्स और प्लास्टिक ड्रम देखे थे. डॉक्टर्स और कश्मीरी युवकों को ये कोडनेम दिए गए थे- मुजम्मिल: अर्शिद,उमर: गनीमुजफ्फर: पीरआदिल: जावेदमुफ्ती: ओवैसी 30 अक्टूबर 2025 को मुजम्मिल की गिरफ्तारी के बाद शाहीन सईद को शक हुआ कि उसने उसकी कार में कुछ छुपाया है. कार की तलाशी लेने पर उसे 1 क्रिंकोव राइफल, 1 पिस्तौल, कई कारतूस, CCTV कैमरे और बैग मिले. घबराकर शाहीन ने इन हथियारों को कचरा डंपिंग जोन के पास छिपा दिया. 8 नवंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शाहीन सईद को अल-फलाह कैंपस से गिरफ्तार कर लिया और सभी हथियार बरामद कर लिए. शाहीन ने यह भी बताया कि उमर और मुजफ्फर उसकी कार का अक्सर इस्तेमाल करते थे. 15 अगस्त 2024 को उमर ने उससे कहा था, 'तुम लोग क्यों देश भक्ति की बातें करते रहते हो? ये सब बकवास है. तुम गलत रास्ते पर हो.' इसके बाद शाहीन ने उसको अपनी कार देना बंद कर दिया.एजेंसियां शाहीन सईद के सभी दावों की अलग-अलग पुष्टि कर रही हैं और पूरा मॉड्यूल अब जांच के दायरे में है. यह भी पढ़ें:-'उन्होंने पूरा जीवन देश की...', सोनिया गांधी को कोर्ट से नोटिस पर प्रियंका का रिएक्शन, कंगना बोलीं - 'ये बाबू लोग'
दिल्ली बम धमाका मामले में गिरफ्तार अल-फलाह मेडिकल कॉलेज, फरीदाबाद से जुड़ी डॉक्टर शाहीन सईद ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किये हैं. एजेंसी सूत्रों के अनुसार, शाहीन के बयान ने आतंकी साजिश, हथियार ट्रेनिंग, फॉरेन ट्रिप और विस्फोटक सामग्री जुटाने से जुड़े कई दावे किए है. अब इन सभी दावों की गहन जांच की जा रही है.
शाहीन सईद ने बताया कि साल 2006 में उसने कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर के रूप में जॉइन किया, जहां वह 2013 तक कार्यरत रही. इसी दौरान उसकी पहली शादी डॉ. जाफर से हुई. साल 2013 में उसने गाजियाबाद के शारिक खान से दूसरी शादी की और 2014–2018 के बीच पति के साथ सऊदी अरब की मजमाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत रही. इस दौरान उसने 2015 में दुबई और 2018 में थाईलैंड की यात्रा भी की. वैवाहिक विवादों के चलते उसने 2017 में तलाक के लिए आवेदन दिया और साल 2023 में उसको कानूनी तौर पर तलाक मिल गया. बच्चों की कस्टडी उसके पति को मिली. साल 2021 में शाहीन सईद ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में जॉइन किया, जहां उसकी शुरुआती तनख्वाह लगभग 1 लाख रुपये महीना थी.
कॉलेज में जॉइनिंग के एक महीने बाद तीन डॉक्टर, डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर और डॉ. मुजफ्फर कॉलेज में आए. समय के साथ शाहीन और डॉ. मुजम्मिल के बीच नजदीकियां बढ़ीं और सितंबर 2023 में उसने एक मौलवी की मौजूदगी में मदरसे में निकाह कर लिया. शाहीन का दावा है कि डॉ. मुजफ्फर और कभी-कभी डॉ. मुज़म्मिल भी अफगानिस्तान में बसने की बातें करता था क्योंकि वहां शरीयत कानून लागू है.
शाहीन सईद ने आगे बताया कि साल 2022 में तीनों डॉक्टर कुछ दिनों के लिए कॉलेज से गायब हो गए. बाद में पता चला कि वे तुर्की गए थे, जहां उन्होंने हथियारों की ट्रेनिंग ली और फिर अफगानिस्तान जाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे. शाहीन के बयान के अनुसार, कश्मीर का रहने वाला एक युवक दानीश, जिसका कोडनेम छोटू था, अक्सर अल-फलाह कॉलेज आता था और डॉक्टर उमर के कमरे में रुकता था. वहीं, मोहसिन नामक कश्मीरी युवक अपनी i20 कार उमर को देता था इसी कार का इस्तेमाल ब्लास्ट में हुआ.
अक्टूबर 2025 में एक सिग्नल ऐप ग्रुप बनाया गया, जिसमें मुजम्मिल, उमर, आदिल, मुफ्ती और मुजफ्फर सदस्य थे. बातचीत के दौरान वे लोग AK-47 को Alikak कहते थे. 2023 और 2024 में शाहीन दो बार कश्मीर गई और दोनों बार वो डॉ. मुजफ्फर के घर ही रुकी. उसने बताया कि उसने वेरिनाग और पहलगाम विजिट किया और डॉ. मुजम्मिल के माध्यम से मुफ्ती इरफान से भी मुलाकात की. एक रात उसने 20–25 साल के तीन लंबी दाढ़ी वाले युवकों को मुफ्ती के घर बैठक करते देखा. उसी रात मुजम्मिल और मुफ्ती देर रात तक बाहर रहे.
पूछताछ में शाहीन सईद ने कबूला कि उसने मुजम्मिल को लगभग 20 लाख रुपये नकद पांच किश्तों में दिए. शाहीन के अनुसार, इन पैसों का इस्तेमाल फर्टिलाइजर खरीदने और विस्फोटक सामग्री तैयार करने में हुआ. हालांकि मुजम्मिल ने उन्हें बताया था कि वह यह पैसा कैदियों की मदद, कश्मीरियों के बेटरमेंट और मदरसा निर्माण में खर्च करेगा. बाद में उसने सिरोही में ग्राम प्रधान जुम्मा खान के माध्यम से एक कमरा 10,000 रुपये महीने पर किराए पर लिया, जहां उन्होंने फर्टिलाइजर स्टोर किया.
उमर और मुजम्मिल के साथ मिलकर उन्होंने कैन बैग, ड्रम खरीदे और सामग्री तीन अलग-अलग स्थानों पर डंप की. शाहीन ने बताया कि मार्च 2025 में उसने उमर की कार में कई फर्टिलाइजर बैग्स और प्लास्टिक ड्रम देखे थे. डॉक्टर्स और कश्मीरी युवकों को ये कोडनेम दिए गए थे-
मुजम्मिल: अर्शिद,
उमर: गनी
मुजफ्फर: पीर
आदिल: जावेद
मुफ्ती: ओवैसी
30 अक्टूबर 2025 को मुजम्मिल की गिरफ्तारी के बाद शाहीन सईद को शक हुआ कि उसने उसकी कार में कुछ छुपाया है. कार की तलाशी लेने पर उसे 1 क्रिंकोव राइफल, 1 पिस्तौल, कई कारतूस, CCTV कैमरे और बैग मिले. घबराकर शाहीन ने इन हथियारों को कचरा डंपिंग जोन के पास छिपा दिया.
8 नवंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शाहीन सईद को अल-फलाह कैंपस से गिरफ्तार कर लिया और सभी हथियार बरामद कर लिए. शाहीन ने यह भी बताया कि उमर और मुजफ्फर उसकी कार का अक्सर इस्तेमाल करते थे. 15 अगस्त 2024 को उमर ने उससे कहा था, 'तुम लोग क्यों देश भक्ति की बातें करते रहते हो? ये सब बकवास है. तुम गलत रास्ते पर हो.' इसके बाद शाहीन ने उसको अपनी कार देना बंद कर दिया.
एजेंसियां शाहीन सईद के सभी दावों की अलग-अलग पुष्टि कर रही हैं और पूरा मॉड्यूल अब जांच के दायरे में है.
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'उन्होंने पूरा जीवन देश की...', सोनिया गांधी को कोर्ट से नोटिस पर प्रियंका का रिएक्शन, कंगना बोलीं - 'ये बाबू लोग'