भायंदर की सोसायटी में घुसा तेंदुआ, मैंग्रोव कॉरिडोर से होकर पहुंचने की पुष्टि !

भायंदर की सोसायटी में घुसा तेंदुआ, मैंग्रोव कॉरिडोर से होकर पहुंचने की पुष्टि !
Leopard enters Bhayander society, confirmed to have entered through mangrove corridor!

 मुंबई,भायंदर पूर्व की एक रिहायशी सोसायटी में शुक्रवार सुबह तेंदुए के घुस जाने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कई घंटों तक चले ऑपरेशन के बाद वन विभाग की टीम ने तेंदुए को सुरक्षित काबू में ले लिया। अब जांच में यह साफ हो गया है कि तेंदुआ भायंदर खाड़ी के किनारे फैली मैंग्रोव बेल्ट को कॉरिडोर की तरह इस्तेमाल करते हुए आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंचा था।

घटना के बाद स्थानीय लोग सहमे हुए हैं। जंगल से काफी दूर स्थित इस इलाके में तेंदुए की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक तेंदुआ संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के वन क्षेत्र से निकलकर रेती बंदर की ओर मौजूद मैंग्रोव पैच से होते हुए भायंदर पूर्व में दाखिल हुआ।

इस मामले में भायंदर के विधायक नरेंद्र मेहता ने कहा कि तेंदुए को पकड़ लिया गया है और घटना में घायल हुए लोगों को 50 हजार रुपये की राशि देने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि “पैसा देना कोई बड़ी बात नहीं है, असली ज़रूरत बेहतर इलाज की है। जब तक तेंदुए से घायल लोग पूरी तरह स्वास्थ नहीं हो जाते, तब तक उनका सही इलाज होते रहना चाहिए।”

विधायक ने यह भी बताया कि रेस्क्यू के बाद तेंदुए में ट्रैकर लगाया गया है। इस ट्रैकर की मदद से उसकी मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि GPRS सिस्टम के ज़रिये अब तेंदुए की सही लोकेशन का पता चलता रहेगा, ताकि वह दोबारा जंगल से बाहर आए तो समय रहते जानकारी मिल सके।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र में तेंदुओं द्वारा मैंग्रोव इलाकों को रास्ते के तौर पर इस्तेमाल करने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। गोराई और भायंदर के आसपास पंजों के निशान और रेस्क्यू की घटनाएं इसका संकेत देती हैं। हालांकि, रिहायशी एरिया में तेंदुए का घुसना हमेशा खतरे की स्थिति पैदा कर देता है।

रेस्क्यू के दौरान मौके पर काफी भीड़ जमा हो गईं थी, जिससे हालात कुछ देर के लिए तनावपूर्ण बन गए। जानकारों का कहना है कि ऐसे ऑपरेशन में भीड़ को कंट्रोल करना बहुत ज़रुरी होता है, नहीं तो जानवर और लोग दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।

फिलहाल तेंदुए को निगरानी में रखा गया है और वन विभाग आगे की कार्रवाही में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रैकर से मिलने वाले डाटा से भविष्य में ऐसे मामलों को पहले ही रोका जा सकता है।