डॉलर के सामने पड़े रुपए कमज़ोर शेयरबाजार में हुआ बड़ा बवाल जानिए कैसे!

पहली बार इसकी वैल्यू डॉलर के मुकाबले 90 के पार पहुंची है। विदेशी में कमी, आयातकों की लगातार मांग और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता के कारण रुपये का यह हाल हुआ है। आरबीआई के लगातार हस्तक्षेप और डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने के बावजूद रुपया लगातार पांचवें दिन गिरा गया है।

डॉलर के सामने पड़े रुपए कमज़ोर शेयरबाजार में हुआ बड़ा बवाल जानिए कैसे!
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डॉलर के सामने पड़े रुपए कमज़ोर शेयरबाजार में हुआ बड़ा बवाल जानिए कैसे!

रुपया आज डॉलर के मुकाबले ऑल-टाइम लो पर चला गया है। आरबीआई के हस्तक्षेप और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी के बावजूद रुपया का यह हाल हुआ। रुपये की कीमत में लगातार पांचवें सत्र में गिरावट आई है। इससे बाजार में भी चिंता है। बाजार पर इसका क्या असर होगा

पहली बार इसकी वैल्यू डॉलर के मुकाबले 90 के पार पहुंची है। विदेशी में कमी, आयातकों की लगातार मांग और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता के कारण रुपये का यह हाल हुआ है। आरबीआई के लगातार हस्तक्षेप और डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने के बावजूद रुपया लगातार पांचवें दिन गिरा गया है।

इस स्तर के पार जाने से रुपया उन कारकों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है जो लंबे समय से इसे नीचे खींच रहे हैं। इनमें विदेशी निवेश में नरमी, आयातकों की लगातार मांग और सट्टेबाजी की बढ़ती पोजीशन शामिल हैं।

गिरावट क्यों हो रहीं है ?

कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी के हेड अनिंद्य बनर्जी ने कहा कि सट्टेबाजों के अपनी पोजीशन को कवर करने और आयातकों की लगातार मांग के कारण रुपये का यह हाल हुआ है। उन्होंने कहा कि इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का पैसा निकालना, येन कैरी ट्रेड को वापस लिए जाने के शुरुआती संकेत एशिया की अन्य मुद्राओं को प्रभावित कर रहे हैं। साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता भी इसका एक कारण शामिल है।

शेयरबाजर हो रही चिंता!

 अमेरिका के टैरिफ के प्रभाव से भी रुपया प्रभावित हुआ है। टैरिफ की घोषणा के बाद से FPI प्रवाह कमजोर बना हुआ है और RBI हाल के हफ्तों में हल्का हस्तक्षेप करता दिख रहा है। रुपये की गिरावट ने भारतीय इक्विटी को भी प्रभावित किया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि निफ्टी का अपने रिकॉउच्च स्तर से लगभग 300 अंकों की गिरावट तकनीकी कारकों से है।