भारत में होगी पहली बार तेंदुओं की नसबंदी !

भारत में होगी पहली बार तेंदुओं की नसबंदी !
Leopards will be sterilized for the first time in India!

मुंबई : महाराष्ट्र राज्य के जुन्नार क्षेत्र की गन्ने के खेतों मे तेंदुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। पारंपरिक वन्यजीव प्रबंधन पद्धतियां अब कारगर नहीं रह गई हैं। स्थानीय भाषा में शुगर बेबी कहें जाने वाले ये तेंदुएं, जंगलों में स्थानांतरण के बाद भी जन बहुल क्षेत्र में वापस आ रहे हैं ई। अधिकारियों ने अब चेतावनी दी है कि ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी सावधान रहें।

महाराष्ट्र के पश्चिमी गन्ना क्षेत्र मे जुन्नार वन विभाग एक ट्रायल करने जा रही है। इधर-उधर घूमने वाले तेंदुओं की नसबंदी करने का योजना बनाई गई। जानवरों को जंगलों मे छोड़ने के बजाय, उनके प्रजनन को उनके स्त्रोत पर ही रोक कर उनकी आबादी में कमी किया जा सकता हैई भारत मे यह प्रक्रिया पहली बार करवाई जायेगी। यह कदम कृषि प्रधान  गांवों में तेंदुओं द्वारा पशुधन की बढ़ती हानि और तेंदुओं द्वारा मनुष्यों पर की जानेवाली जानलेवा हमला के मद्देनजर उठाया गया। जुन्नार मानव-तेंदुओं के सह-अस्तित्व के लिए एक प्रमुख अध्ययन स्थल बन गया है, लेकिन हाल के घातक हमलों ने इस नाजुक संतुलन को गंभीर तनाव में डाल दिया है I

अफ्रिका की तरह होगी नियंत्रण

अफ्रिका महादेश में विगत 30 सालों से हाथियों, शेरों, बबूनों और कई अन्य वन्यजीवों की प्रजातियों पर आबादी नियंत्रित करने हेतु अलग - अलग  तरीको का उपयोग किया जा रहा है। जो अब महाराष्ट्र के जुन्नार क्षेत्र में विशेष रूप से प्रयोग किया जायेगा.

 मादाओं पर पर होगा परीक्षण

भरतीय वन्यजीव क्षेत्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक बिलाल हबीब कहा कि अगर दो वर्ष तक मादाओं के जन्म को नियंत्रित करने का प्रयास करे तो शेर, चीता, बाघ, रीछ, सिंहनी, आदि बड़े जानवरों के बच्चों की आबादी कम करने में सक्षम हो पाएंगे I

नसबंदी की प्रक्रिया

उच्च- संघर्ष वाले क्षेत्र में वयस्क मादा तेंदुओं को बेहोश किया जाएगा, चिकित्सा जांच की जाएगी और गर्वनिरोधक के माध्यम से उनकी नसबंदी की जाएगी, ठीक होने के बाद उनको वापस उनके गृह मे रखा जाएगा। जुन्नार जैसे जगहों मे तेंदुएं कुछ ही मिनटों मे बाग बगीचे मे छिप जाते हैं इसलिए उसे पकड़ना मुश्किल होता है। अगर किसी तेंदुएं की नसबंदी की गई हो और वो तेंदुएं कईं सालों तक दिखे ही नहीं तो बाद में उसे गर्भनिरोधक दवा देकर नियंत्रित करना भी संभव नहीं होता। जब तक रेडियो-कॉलर, कैमरा ग्रिड और ज़मीन पर खोज करने जैसी ट्रैकिंग व्यवस्था को बड़े स्तर पर नहीं बढ़ाया जाता तब तक इस योजना के नतीजे को सफल नही माना जाएगा I

वैज्ञानिकों का राय 

वैज्ञानिकों का कहना है कि सिर्फ कुछ तेंदुओं की नसबंदी करके हम तेंदुओं के आबादी को कम नही कर सकते. क्योंकि बाकि के तेंदुओं वैसे ही शिकार व प्रजनन करते रहेंगे। बड़ा बदलाव तभी दिखेगा जब ज्यादातर मादा तेंदुएं प्रजनन करने मे सक्षम न हो तभी  शिकार व आबादी मे कमी दिखेगी. महाराष्ट्र के पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव, सुनील लिमये ने कहा कि शुरुआत में कुछ मादा तेंदुओं के डिंबोत्सर्जन रोकने के लिए गर्भ निरोधक इंजेक्शन के उपयोग से भी इस प्रक्रिया पर काबू पाया जा सकता है I लिमये ने बताया कि अफ्रीका में शेर और चीते जैसे जानवरों पर जो ट्रायल (अध्ययन) किए गए थे वे अच्छे और उम्मीद जगाने वाले साबित हुए। लेकिन भारत पहली बार तेंदुओं पर ऐसा परीक्षण कर रहा है। इससे यह पता चलेगा कि आवादी बढ़ने की गति कम होती है या नही।

तेंदुओं को पकड़ने से समाधान क्यों नही निकलता

जब भी कोई तेंदुआ दिखाई देता है तो लोगों में डर का माहौल बन हो जाता है. केवल तेंदुएं को पकड़ने से इसका समाधान नही निकलता क्योंकि एक को पकड़े जाने से दूसरा तेंदुआ उनकी जगह ले लेता है और यह प्रक्रिया कभी खत्म नही होती। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत, तेंदुए अनुसूची 1 में आता हैं। उन्हें तभी मारा जा सकता है जब वे आदमखोर साबित हो या गंभीर रूप से घायल हो और उनका इलाज संभव न हो। पहले उन्हे जिंदा पकड़ने की कोशिश की जानी चाहिए अगर यह संभव न हो तब उसे मार दिया जा सकता है I वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए उनके स्थानांतरण के लिए केंद्र सरकार की मंज़ूरी होनी जरूरी है। तेंदुओं को कानून की एक अलग श्रेणी (अनुसूची II) में रखने पर विचार हो रहा है, ताकि राज्य सरकार उन्हें वैज्ञानिक तरीक़े से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने (स्थानांतरण) की अनुमति पा सके।