फ़र्ज़ी आधार कार्ड किंगपिन: 19 हज़ार फ़र्ज़ी आधार कार्ड बनाने वाला प्रमोद निषाद गिरफ्तार!
यूपी एसटीएफ ने शुक्रवार को एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जिसने फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। जांच में सामने आया है कि आरोपी अब तक करीब 18 से 19 हजार आधार कार्ड बनवा चुका था या उनमें बदलाव कर चुका था।
फ़र्ज़ी आधार कार्ड किंगपिन: 19 हज़ार फ़र्ज़ी आधार कार्ड बनाने वाला प्रमोद निषाद गिरफ्तार!
यूपी एसटीएफ ने शुक्रवार को एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जिसने फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। जांच में सामने आया है कि आरोपी अब तक करीब 18 से 19 हजार आधार कार्ड बनवा चुका था या उनमें बदलाव कर चुका था।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में गिरोह के सरगना प्रमोद कुमार निषाद को गिरफ्तार किया गया है। 28 वर्षीय प्रमोद निषाद बहराइच जिले का निवासी है।
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि आरोपी अब तक करीब 18 से 19 हजार आधार कार्ड बनवा चुका था या उनमें अवैध रूप से अपडेट कर चुका था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, चेक बुक समेत बायोमैट्रिक और रेटिना स्कैनर, वेबकैम, कई मोबाइल स्क्रीनशॉट, जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां, एक कार और 2680 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
असल में, एसटीएफ ने शुक्रवार को एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पोर्टल के माध्यम से फर्जी जन्म और निवास प्रमाण पत्र तैयार कर अवैध रूप से आधार कार्ड बनवा रहा था। यह गिरोह बहराइच–नेपाल सीमा क्षेत्र के आसपास काफी समय से सक्रिय था। कार्रवाई के दौरान एसटीएफ ने गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है।
आरोपी प्रमोद निषाद शिक्षित था और उसने जनसेवा केंद्र की आड़ लेकर हजारों लोगों की पहचान बदलने का गंभीर और खतरनाक काम किया।
प्रमोद बहराइच जिले का निवासी है
28 वर्षीय प्रमोद निषाद बहराइच जिले के थाना मुर्तिहा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सेमरी मलमला का रहने वाला है। वह बीएससी तक पढ़ा-लिखा है। शुरुआती दौर में वह अन्य युवाओं की तरह सरकारी योजनाओं से जुड़े ऑनलाइन काम सीख रहा था। वर्ष 2021 में उसने जनसेवा केंद्र पर ऑनलाइन आवेदन भरने का प्रशिक्षण लिया और बाद में लाइसेंस हासिल कर ‘निषाद कंप्यूटर सेंटर’ के नाम से अपना जनसेवा केंद्र खोल लिया।
पहले सीखा काम, फिर बन गया गिरोह का सरगना
जनसेवा केंद्र के माध्यम से सरकारी पोर्टलों पर काम करते-करते प्रमोद को सिस्टम की बारीक समझ हो गई थी और वह धीरे-धीरे उसकी खामियों को पहचानने लगा। साल 2024 के आखिरी महीनों में टेलीग्राम पर उसकी पहचान अकील सैफी नाम के व्यक्ति से हुई। इसी संपर्क के बाद वह पूरी तरह गैरकानूनी गतिविधियों में उतर गया।
अकील सैफी ने उसे फर्जी जन्म और निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले पोर्टल की पहुंच के साथ-साथ आधार कार्ड तैयार करने की यूजर आईडी और पासवर्ड देने का प्रस्ताव रखा था, जिसकी कीमत 35 हजार रुपये तय की गई थी।
0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के आधार भी बनाए गए
आईडी और पासवर्ड मिलने के बाद प्रमोद ने अपने कंप्यूटर सिस्टम में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाला पोर्टल, नकली निवास प्रमाण पत्र का सॉफ्टवेयर और आधार नामांकन व संशोधन से जुड़े टूल इंस्टॉल कर लिए। इसके बाद उसने डिजिटल धोखाधड़ी को संगठित रूप दे दिया।
वह महज एक–दो मिनट में कूटरचित डिजिटल दस्तावेज तैयार कर लेता था, जिनके आधार पर नए फर्जी आधार कार्ड बनवाए जाते थे। साथ ही, पहले से मौजूद आधार कार्ड में नाम, जन्मतिथि और पता तक बदले जाते थे। इस पूरे फर्जीवाड़े में 0 से 18 वर्ष तक के बच्चे भी उसके निशाने पर थे।