​UPI फ्रॉड: ₹805 करोड़ की ठगी जानिए कैसे हो रहा है ये फ्रॉड!

भारत में UPI पेमेंट अब जितना आसान हुआ है, उतना ही यह साइबर ठगी का नया जरिया भी बनता जा रहा है। इस साल नवंबर तक UPI के माध्यम से करीब 805 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। जैसे-जैसे UPI का इस्तेमाल बढ़ा है, वैसे-वैसे ठगों के तरीके भी और चालाक हो गए हैं।

​UPI फ्रॉड: ₹805 करोड़ की ठगी जानिए कैसे हो रहा है ये फ्रॉड!
UPI fraud: ₹805 crore defrauded, know how this fraud is happening!

UPI फ्रॉड: ₹805 करोड़ की ठगी जानिए कैसे हो रहा है ये फ्रॉड!

भारत में UPI पेमेंट अब जितना आसान हुआ है, उतना ही यह साइबर ठगी का नया जरिया भी बनता जा रहा है। इस साल नवंबर तक UPI के माध्यम से करीब 805 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। जैसे-जैसे UPI का इस्तेमाल बढ़ा है, वैसे-वैसे ठगों के तरीके भी और चालाक हो गए हैं।

सरकार ने साइबर फ्रॉड रोकने के लिए कई नियम और सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, लेकिन कुछ तकनीकी कमियों और लोगों की जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर अपराधी अब भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। राहत की बात यह है कि अगर पिछले वित्तीय वर्ष से तुलना करें, तो इस साल ठगी की कुल रकम में कमी दर्ज की गई है। फिर भी, डिजिटल लेनदेन करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

ऑनलाइन पेमेंट ने जहां लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं यह कई बार उनके लिए परेशानी भी बन रहा है। भारत में चालू वित्तीय वर्ष में नवंबर तक UPI के माध्यम से 805 करोड़ रुपये की डिजिटल ठगी दर्ज की गई है। सरकार ने सोमवार को संसद में जानकारी दी कि इस दौरान 10.64 लाख से ज्यादा फ्रॉड के मामले सामने आए हैं।

हालांकि राहत की बात यह है कि यह आंकड़ा पिछले दो वित्तीय वर्षों की तुलना में कम है, लेकिन सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे UPI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों के लिए लोगों को निशाना बनाने के मौके भी बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन करते समय सावधानी बेहद जरूरी है।

जानकारी के मुताबिक, UPI से जुड़ी धोखाधड़ी के आंकड़े लोकसभा में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पेश किए थे। ये आंकड़े भारत में डिजिटल पेमेंट की बड़ी सफलता के साथ-साथ बढ़ती साइबर ठगी की चिंता को भी सामने रखते हैं। एक ओर देश में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर सिस्टम में मौजूद कुछ कमियों का फायदा उठाकर ठग लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष में UPI से जुड़ी ठगी की कुल रकम 981 करोड़ रुपये रही, जिसमें करीब 12.64 लाख मामले दर्ज किए गए। इससे पहले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा और ज्यादा था, जब 1,087 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई और 13.42 लाख केस सामने आए थे।

अगर वित्तीय वर्ष से तुलना करें, तो स्थिति काफी बदल चुकी है। उस समय UPI के जरिए ठगी की रकम सिर्फ 242 करोड़ रुपये थी। इससे साफ है कि बीते कुछ वर्षों में UPI फ्रॉड के मामलों और रकम में तेज़ी से इज़ाफा हुआ है।

सरकार ने वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए कई जरूरी कदम उठाए हैं। इसके तहत नागरिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन नंबर के जरिए साइबर और पैसों से जुड़ी ठगी की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

इसके अलावा डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) और ‘चक्षु’ (Chakshu) सुविधा शुरू की है। इन माध्यमों से लोग ठगी से जुड़े संदिग्ध कॉल, SMS और व्हाट्सऐप मैसेज की जानकारी देकर उनकी शिकायत कर सकते हैं, जिससे ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिल सके।

आज कल सभी जगह यूपीए पेमेंट चल रहा है। और इसी के चलते हम लोगों ने कैश को अपने 
इन सभी सुरक्षा इंतजामों के बावजूद साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोशल इंजीनियरिंग, फिशिंग लिंक, फर्जी कस्टमर केयर कॉल और रिमोट एक्सेस स्कैम जैसे तरीके सिस्टम की कुछ कमजोरियों का फायदा उठाकर तकनीकी सुरक्षा को पार कर रहे हैं और लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।

साइबर ठगी से सुरक्षित रहने के लिए कुछ बातों का खास ध्यान रखें। कभी भी अपना UPI पिन या OTP किसी को न बताएं। किसी अनजान वेबसाइट या प्लेटफॉर्म के जरिए UPI पेमेंट करने से बचें।

किसी भी संदिग्ध लिंक को ऐप में खोलने या उस पर क्लिक करने से पहले सतर्क रहें। साथ ही, अपनी बैंक से जुड़ी जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें, चाहे वह खुद को अधिकारी या कस्टमर केयर ही क्यों न बता रहा हो।